स्विट्ज़रलैंड : धरती का स्वर्ग

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इस आइकॉनिक स्विट्जरलैंड को देखने/सुनने के लिए कई वर्ष से सोच रही थी और सुयोग मिला। दरअसल इसके पहले भी मैंने स्विट्ज़रलैंड देखा था लेकिन 25 वर्ष पूर्व। बहुत कुछ बदला होगा इन वर्षों में लेकिन प्राकृतिक सुंदरता ज्यों की त्यों होगी, ऐसा मेरा विश्वास था। सच स्विट्जरलैंड एक ऐसा देश है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। आल्प्स की गोद में बसा हुआ हरियाली और बर्फ की चादर से ढका हुआ, जिनेवा झील के तट पर बसे शहर की शान स्विट्जरलैंड– एक ऐसा देश है जो ‘धरती का स्वर्ग’ कहलाता है साथ ही जीरो क्राइम वाला देश भी। स्विट्जरलैंड घूमते हुए आपको यही लगेगा जैसे आप किसी खूबसूरत, मनमोहक कैलेंडर का पृष्ठ पलट रहे हैं! जितना भी निहारिए तनिक मन नहीं भरने वाला…
इस यात्रा में हमने कुछ नए स्थान देखें जो पिछली यात्रा में नहीं देख सकी थी, तो कुछ रिपीट भी हुआ। इस बार हमने विश्व प्रसिद्ध कलाकार ‘चार्ली चैप्लिन’ का घर देखा। इस टूर को लेने का मेरा खास मकसद चार्ली चैपलिन को भी देखना था। मेरी पूरी किताब पढ़िए और मेरे साथ स्विट्जरलैंड का मजा लीजिए। ग्रुप के सभी सहयात्रियों का दिल से आभार प्रकट करती हूं जिनकी वजह से मेरी यह यात्रा और ज्यादा रोचक, यादगार बनी।
अंजनी प्रकाशन के श्री नंदलाल जी का धन्यवाद जिन्होंने मेरी हर किताब को छापने का बीड़ा उठा रखा है। मैं बिना थके लिखती रहूं और वह प्रकाशित करते रहें।

माला वर्मा

Weight 257 g
Dimensions 21 × 14 × 1 cm

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Description

स्विट्जरलैंड : पहाड़ों, शहरों और
स्वयं से मुलाकात

माला वर्मा का यह यात्रा-वृत्तांत केवल देशों और शहरों की सैर नहीं है, बल्कि अनुभवों, भावनाओं और आत्मचिंतन की एक सजीव कथा है। लेखिका जब घर से निकलती हैं, तो पाठक भी उनके साथ एक ऐसे सफर पर चल पड़ता है जहाँ हर मोड़ पर नया दृश्य, नई संस्कृति और नया एहसास सामने आता है। विदेशी नगरों की व्यवस्थित जीवन-शैली, प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे पर्वतीय क्षेत्र, झीलों की शांत लहरें और बर्फ से ढकी चोटियाँ — ये सब वर्णन मात्र न होकर लेखिका के भीतर घट रहे भावों से जुड़ जाते हैं। कहीं विस्मय है, कहीं रोमांच, तो कहीं गहरी शांति का अनुभव।
इस यात्रा में लेखिका की दृष्टि सूक्ष्म है; वह केवल देखती नहीं, बल्कि महसूस करती हैं। स्थानीय लोगों का व्यवहार, रोज़मर्रा का जीवन और प्रकृति के साथ मनुष्य का संबंध उनके लेखन में सहज रूप से उभर आता है। भाषा सरल, प्रवाहमयी और चित्रात्मक है, जो पाठक के मन में दृश्य रच देती है। यात्रा के अंत तक पहुँचते-पहुँचते यह स्पष्ट हो जाता है कि यह सफर बाहरी दुनिया के साथ-साथ आत्मा के भीतर की यात्रा भी है। यही गुण इस कृति को साधारण यात्रा-वर्णन से ऊपर उठाकर एक संवेदनशील और प्रेरक यात्रा-वृत्तांत बना देता है।
सादर धन्यवाद

मोहित शर्मा
सहायक प्रबंधक
अंजनी प्रकाशन

 

 

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