लघुकथा पुस्तकें
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लघुकथा खंड में कम शब्दों में गहरी बात कहने वाली हिंदी लघुकथाओं के संग्रह हैं — माला वर्मा की ‘मायरा’, ‘मैं हूँ न !’, ‘परिवर्तन’, ‘थोड़ी सी हँसी’ और ‘इंग्लिश-विंग्लिश’। ये छोटी-छोटी कहानियाँ समाज और रिश्तों के क्षणों को सहज भाषा में पकड़ती हैं और पाठक को सोचने पर विवश करती हैं। Collections of Hindi laghukatha (flash fiction) by Mala Verma — quick to read, with a thought in every story.
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